Research Article
Assistant Professor , Maharaja Saiyajirao University of Baroda, Vadodara, Gujarat, India
Submitted: 03-07-2025
Accepted: 26-07-2025
Published: 15-08-2025
Pages: 358-362
भारतीय बाल साहित्य हमारी प्राचीन विरासत है। यह एक तथ्य है कि भारत में बाल साहित्य शब्द पश्चिम से आया है, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि बाल साहित्य हमारे पास पश्चिम से आया है? भारत के प्राचीन साहित्य, पंचतंत्र, हितोपदेश में हमें बाल साहित्य के अवशेष मिलते हैं। भारत में हम व्यक्तित्व, समाज, संस्कृति, साहित्य आदि में वैश्विकता देखते हैं। इस शोध पत्र में भारतीय बाल कहानियों में वैश्विकता कैसे दिखती है, भारत की धरती पर जिस तरह से एक बच्चे का पालन-पोषण होता है, वह दुनिया के बच्चों के लिए कैसे उपयोगी होगा, हमारी कहानियों से दुनिया के बच्चे कैसे बड़े हुए, दुनिया ने भारतीय बाल साहित्य से क्या लिया, यह कितना उपयोगी रहा — इन सभी का अध्ययन इस शोध लेख में किया जाएगा। भारतीय बाल साहित्य हमारी प्राचीन संस्कृति और धरोहर का अभिन्न अंग है। भारतीय बाल कथाएँ न केवल बच्चों के लिए मनोरंजन का माध्यम रही हैं, बल्कि ये जीवन के नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं की भी शिक्षा देती रही हैं। इन काव्यमूलक और कथामूलक रचनाओं में बच्चों के लिए उपयोगी संदेश होते हैं जो उनके मानसिक और नैतिक विकास में सहायक होते हैं। हालाँकि बाल साहित्य का शब्द पश्चिमी देशों से आया, लेकिन भारतीय संस्कृति में इसके समृद्ध उदाहरण बहुत प्राचीन काल से मिलते हैं। पंचतंत्र, हितोपदेश और जटायु कथा जैसे ग्रंथों में बाल साहित्य के प्राचीन स्वरूप के उदाहरण देखे जा सकते हैं। भारत में बच्चों के पालन-पोषण की जो परंपरा है, वह न केवल भारतीय समाज के लिए, बल्कि समस्त विश्व के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती है। भारतीय बाल कहानियों में वैश्विकता को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय बाल साहित्य ने न केवल भारतीय बच्चों के जीवन को प्रभावित किया, बल्कि दुनिया भर के बच्चों के जीवन को भी आकार दिया है। इस शोध पत्र में यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि भारतीय बाल कहानियाँ वैश्विक दृष्टिकोण से कैसे संगत हैं और भारतीय बाल साहित्य ने विश्व के विभिन्न देशों के बच्चों को कैसे प्रभावित किया है।