Research Article
Submitted: 15-09-2025
Accepted: 20-10-2025
Published: 31-12-2025
Pages: 356-363
प्राचीन भारत में शिक्षापद्धती का एक उच्चतम स्त्रोत विकसित था। गुरु के निरीक्षण में गुरुगृही रहकर शिक्षा प्राप्त करना। गुरुकुल ज्ञान परंपरा - गुरु का परिवार बनकर अध्ययन कर अपने ज्ञान को विकसित करना। गुरुकुल की स्थापना अधिकतर वनों में उपवन में तथा तो किसी राजा सामन्तो के प्रोत्साहन पाकर होती थी। नालंदा, तक्षशीला और विक्रमशीला जैसे विश्वविद्यालय प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति के विकसित रूप थे। आधुनिक शिक्षा प्रणाली आज की शिक्षा का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्रोत है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में किताबी ज्ञान को अधिक महत्व दिया गया है। पाठ्यक्रम की ढाचे में ही विद्यार्थी पर्याप्त शिक्षा प्रदान कर रहा है। भारत का एक आदर्श सक्षम भारतीय के रुप में विद्यार्थी विकसित होना यही शिक्षा का मुख्य उदेश होना गुरुकुलों का उद्देश्य था, जिसकी कमी आधुनिक शिक्षा प्रणाली में दिखती है जो विकसित होनी चाहिये। शालेय माध्यम से महाविद्यालयीन माध्यम तक शिक्षा प्रवाह आधुनिक काल के शिक्षा प्रणाली का अध्ययन पथ है। किसी एक विषय की शिक्षा प्राप्त कर अपनी आर्थिक उन्नती को प्रमुख उद्देश मानकर विद्यार्थी शिक्षण ले रहा है। जो विद्यार्थी को एक ही विषय की अध्ययन पर संकुचित करता है। गुरुकुल शिक्षा परंपरा और आधुनिक शिक्षा पद्धती का समग्र चिंतन करना ही इस शोध निबंध का मुख्य उद्देश है। गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की फायदे तथा आधुनिक शिक्षा प्रणाली में दिखते अभाव, इसपर चिंतन भारतीय शिक्षा प्रणाली की स्रोत पर अधिक विस्तृत दृष्टी से देखने की ऊर्जा देगी।